True story


जब निगाहें मिलीं: नाज़िश और रिया की कहानी

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नाज़िश आलम, एक शांत स्वभाव का लड़का, अपनी किताबों और कविताओं की दुनिया में खोया रहता था। उसकी आँखों में हमेशा एक गहरी सोच और दिल में अनकही भावनाएँ छिपी रहती थीं। वहीं रिया, कॉलेज की सबसे चंचल और खुशनुमा लड़की थी, जिसकी हँसी पूरे गलियारे में गूँजती थी। दोनों एक ही कॉलेज में थे, पर उनकी दुनियाएँ बिल्कुल अलग थीं। नाज़िश अक्सर लाइब्रेरी में घंटों बिताता, जबकि रिया कैंटीन में दोस्तों के साथ गप्पे मारती या कॉलेज के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेती।



एक दिन, कॉलेज के वार्षिक साहित्य समारोह के लिए नाज़िश को एक कविता पाठ के लिए चुना गया। वह मंच पर जाते हुए थोड़ा घबरा रहा था। उसकी नज़रें दर्शकों के बीच घूम रही थीं, तभी उसकी आँखें रिया पर पड़ीं। रिया, जो आमतौर पर बहुत मस्ती में रहती थी, उस दिन शांत बैठी, नाज़िश को ध्यान से देख रही थी। उसकी आँखों में एक अलग-सी चमक थी, जो नाज़िश ने पहले कभी नहीं देखी थी। नाज़िश ने अपनी कविता शुरू की, "कुछ पल ऐसे होते हैं ज़िंदगी में, जब अल्फाज़ कम पड़ जाते हैं..."। उसकी आवाज़ में एक गहराई थी, जो रिया के दिल को छू गई। कविता खत्म होने पर हॉल तालियों से गूँज उठा, और नाज़िश ने देखा कि रिया की आँखों में हल्की नमी थी।

उस दिन के बाद, रिया को नाज़िश में कुछ ख़ास नज़र आने लगा। वह अक्सर लाइब्रेरी के पास से गुज़रते हुए नाज़िश को देखती। एक दिन, रिया ने हिम्मत करके नाज़िश से बात करने की सोची। वह उसके पास गई, "तुम्हारी कविता बहुत अच्छी थी, नाज़िश। मैंने पहले कभी तुम्हें ऐसे नहीं देखा।" नाज़िश थोड़ा हिचकिचाया, "धन्यवाद, रिया। मुझे लगा तुम्हें शायद ऐसी कविताएँ पसंद नहीं आती होंगी।" रिया मुस्कुराई, "ज़रूरी नहीं कि जो इंसान हँसता हो, उसे गहराई पसंद न हो।"

धीरे-धीरे, उनकी दोस्ती गहरी होती गई। नाज़िश को रिया की चंचलता में सुकून मिलने लगा, और रिया को नाज़िश की शांत दुनिया में एक नया आयाम मिला। वे घंटों साथ बैठते, कभी लाइब्रेरी के कोने में, कभी कॉलेज के बगीचे में। नाज़िश उसे अपनी लिखी कविताएँ सुनाता, और रिया उसे कॉलेज की कहानियाँ सुनाती। रिया ने नाज़िश को हँसना सिखाया, दुनिया को अलग नज़र से देखना सिखाया। नाज़िश ने रिया को भावनाओं की गहराई और शब्दों का जादू समझाया।

एक शाम, कॉलेज के फेयरवेल पार्टी में, नाज़िश ने रिया के लिए एक ख़ास कविता लिखी थी। जब उसने वह कविता सुनाई, तो हर शब्द रिया के दिल को छू गया। कविता के अंत में नाज़िश ने रिया की ओर देखा और कहा, "रिया, तुमने मेरी बेरंग दुनिया में रंग भर दिए हैं। क्या तुम मेरी ज़िंदगी का हिस्सा बनोगी?"

रिया की आँखों में खुशी के आँसू थे। उसने बिना कुछ कहे नाज़िश का हाथ थाम लिया। उस पल, उन्हें लगा जैसे उनकी किस्मत की किताब के पन्ने आपस में मिल गए थे। नाज़िश और रिया की कहानी सिर्फ़ एक प्रेम कहानी नहीं थी, बल्कि यह दो अलग-अलग दुनियाओं का मिलन था, जहाँ प्यार ने हर अंतर को पाट दिया था। वे जानते थे कि उनका सफ़र अभी शुरू हुआ है, और वे इसे साथ मिलकर तय करने के लिए तैयार थे, हर मोड़ पर एक-दूसरे का हाथ थामे हुए।


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